रंग बिरंगी सी खुश्बू है हवा मे
तुमसे होकर यह गुज़री है शायद,
तुम जो मुस्कुराये थे उस दिन,
ज़हन से बाहर मेरी आँखो मे है अब,
धीमे से गीत सुनाना है तुमको
करीब से इस सामंजस्या को महसूस तो करो,
इंतेज़ार है, तुम छुओगे मुझको
और रिहा करोगे मेरे जज़्बातों को अब,
चादर के गर्म कोने से सिसकियाँ ले रही यादें,
दूरियाँ हैं ज़रूरी ये भी हम सब माने,
कच्चे रास्तों से पीले फूल चुने हैं,
क्या माफ़ कर दोगे अगर ग़लती हो जाए हमसे जाने-अंजाने?
रुका हुआ हूँ पल-पल को तराशने के लिए,
तुमसे ही सीख रहा हूँ खूबसूरती मे ढालना और ढल जाना,
अंजान ख्वाहिशें हैं तुम्हारे लिए इस खाली मॅन के आसमानो मे,
तुम्हारी इज़ाज़त बस चाह रहा हूँ दो लफ़ज़ो को बताने के,
आँखों से तो कई बातें कर चुका हूँ मुस्कुरा कर,
शायद भाषा ही मेरी अटपटी सी है जो तुम समझ नही पाते,
रात के कटोरे मे से मीठी चटकार भरते देखा हूँ तुम्हारी आँखों को,
दुआ मेरी यही रहेगी हमेशा की तुम यूँ ही रहो मुस्कुराते |