कैसे तुम इतने दूर हो, पर कितना करीब सा महसूस होते हो,
दो रंगो के शब्दो मे इतनी बैचेनी है, फिर भी कितना कुछ कहते हो,
एक टुकड़ा ठंडी छाओ का जो तुम मुझसे तोड़ कर ले गये,
क्या तुमको सुकून है उसमे?
एक तूफान सा मॅन है तुम्हारा, मचलता, फिर दुनिया के सामने इतना शांत कैसे रहते हो.
कारे दो नैनो से तुम खुद को नही छुपा सकते मेरे सामने,
शब्दों का जला तो आँखों को धोका देता है,
मैने तो मॅन के उजलों से है तुम्हे देखा,
इतनी खूबसूरत हो, और उसमे भी सिकंज है बेपरवाह सोच की,
मैं दूर हूँ तुमसे पर सबसे पास भी, आँखें बंद करके देखो, मिट जाएँगी दूरियों की रेखा.
हवाओं की मौज़ूदगी ही है मेरा प्रमाण, जो तुमको छू कर कितना सुहावना सा हो गया है,
महसूस तो करो ज़रा, जो तुम्हारी सांसो से होकर गुज़रा है वो मेरी साँसें तो नही,
झूठ और सच के दरारों मे फँसा हूँ,
तुम ही रिहा करो मुझे सच्चाई से रूबरू कर,
मैं जो भी कह रहा, यह सारे शब्दों का ढेर टेहर्रा, पर शायद कहीं यह तुम्हारे मॅन की बातें तो नही.
तुम्हारा नाम मोहब्बत के पन्नो मे आता है आज कल,
आगे पलट कर उसको जुदा नही करना चाहता खुदसे,
तहरा हूँ तुमसे एक मुलाकात की आस मे,
क्यों की वो खुदा कफा हो चला मेरे करमो के लिए मुझसे |