छोटी सी बात

एक छोटी सी बात है बस,
तुम्हारी बातें थोड़ी ख़ास है बस,
रात ढल चुकी है अपने ही एहसास मे,
बारिश भी भिगो रही इससे अपने ही आवास मे,
मैं यह सोच रहा की तुम क्या सोच रही,
क्या बातें इतनी गहरी हैं की हमारे लफ्ज़ सासें खोज रही,
मन कह रहा थोड़ा रुक कर देखूं इस वक़्त को,
हाथ बढ़ाऊ की रुक जाऊँ, की छुलु उस शक्स को,
तुम जो महसूस कर रहे, मैं कोशिस मे हूँ उसके पास जाने की,
थोड़ा सा जल ही ना जाऊँगा, पर मंजूर है यह दर्द भी,
नैनो के नक्शें मे गुम्म हो जाऊँगा,
पर यह भी ज़रूर पता है की खुद को ही किसी तरह पाऊँगा,
थोड़ा देर से आया हूँ, क्यूंकी दूर से आया हूँ,
भरोसा ही चाहिए हिसाब मे, मोह्हब्बत का पैगाम है पूरे गुरूर से लाया हूँ |

Leave a comment