वादा करो आओगे

दिन का एक टुकड़ा संभाल कर रख लिया है मैने,
वादा करो तुम आओगे,
वादा करो आओगे और अपनी हथेली मे एक सेर रात की भी लाओगे,
चाँद को भी छुट्टी दे दी मैने की तुम आकर मुझे रोशन कर जाओगे,
तुम्हारे आने की तय्यारियाँ भी पूरी कर ली है मैने,
जगमगाते जुगनुवन को मैने घर की खिड़कियों पर सजाया है,
धुंधले शीशो को यादों के भाप से सॉफ कर चमकाया है,
पहली धूप से दीवारों को महकाया है,
कहो तुम आओगे, तुम आओगे जब,
तो यह सारा शोर जो मेरे ज़हेन मे बेखौफ़ घूम रहा है चला जाएगा,
तुम आओगे तब घर के छत से टकराती उन डालियों को भी सुकून आएगा,
इंतेज़ार तुम्हारा ही नही है बस तुम्हारे ख़याल का भी है,
जो उससी वक़्त मुझसे अलग हो कर तुम्हारे पास छूट गई जब तुमने मुझे गले से लगाया था,
और बेसाब सी उस रात को वहीं उस वक़्त मे ही ठहरा दिया था,
अब बस शब्दों से उन लम्हों को सज़ा सवार रहा हूँ,
की तुम आओगे और हम उस लम्हे को फिर से जी लेंगे |

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